गांधारी के किरदार में नज़र आई अभिनेत्री 'आरती नागपाल'

 

हिन्दी फिल्म, टेलीविजन और थियेटर अभिनेता व निर्माता पुनीत इस्सर द्वारा लिखित व निर्देशित नाटक ’महाभारत’ का दिल्ली में शनिवार को जबरदस्त मंचन किया गया। नाटक के लगातार दो शो प्रस्तुत किए गए और दोनों शो हाऊसफुल रहे। दिल्ली में महाभारत नाटक का सुरूर इस कदर छाया रहा की दर्शक सुबह से ही सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में हो चुके थे और शो शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे इतना ही नहीं शो को देखने के लिए विभिन्न राज्यों से भी दर्शक आए हुए थे

महाभारत नाटक को प्रोत्साहित करने के लिए देश के महान नेता श्री अडवाणी जी तथा हिंदी सिनेमा के महान कलाकार रजा मुराद भी मौजूद रहे। दर्शकों में नाटक को लेकर काफी उत्साह देखा गया क्योंकि इतिहास में पहली बार दुर्योधन तथा कर्ण के बीच की निःस्वार्थ तथा निश्छल मित्रता और निष्ठा एक सशक्त मंचन द्वारा प्रदर्शित किया गया।


महाभारत नाटक मे गांधारी का प्रमुख पात्र निभाया अभिनेत्री आरती नागपाल ने।


उन्होंने बताया कि जब हम महाभारत की घटनाओं पर गौर करेंगे तो आपको हर पात्र कहीं न कहीं युद्ध के ल‌िए ज‌िम्मेदार द‌िखेगा लेक‌िन सबसे बड़ा ज‌िम्मेदार व खलनायक दुर्योधन को माना जाता है और उनके खलनायक बनाने में माता गांधारी की विशेष भूम‌िका रही थी। गंधार की राजकुमारी गांधारी ने महाभारत युद्ध की नींव उस समय डाली जब नेत्रहीन धृतराष्ट्र से व‌िवाह करने ल‌िए अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली और जीवन भर पट्टी नहीं खोलने की प्रत‌िज्ञा ली। गांधारी की प्रत‌िज्ञा का पर‌िणाम यह हुआ क‌ि इनका बड़ा पुत्र दुर्योधन ज‌िसे इन्होंने सबसे ज्‍यादा महत्व द‌िया दृष्ट‌िहीन माता-प‌िता को पाकर गलत राह पर चल पड़ा और इसमें मार्ग दर्शक बने मामा शकुनी।

साथ ही, नाटक के बारे मे उन्होंने कहा कि हमारे इस मंचित नाटक से आज की युवा पीढ़ी को महाभारत के पात्रों के चरित्र व उनके जीवन को जानने का एक सुनहरा मौका मिला और आगे भी हम अपनी आने वाली पीढ़ी को महाभारत नाटक को देखने के लिए प्रेरित करेंगे, क्योंकि आज की युवा पीढ़ी अपने इतिहास से बिल्कुल भी रूबरू नहीं है। और महाभारत के सभी पात्र कोई न कोई संदेश जरूर देते है जिससे युवा पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।


दिल्ली से रोहित बिसाईया की रिपोर्ट