मनोज कुमार ने दिया, हिंदी सिनेमा को देश भक्ति का रंग- प्रोफेसर रोहित बिसाईया

 

भारत का रहने वाला हूँ भारत की बात सुनाता हूं.... हिंदी सिनेमा के 'भारत कुमार' के नाम से पहचाने जाने वाले दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार की अदाकारी ने हर किसी के दिल में अपनी खास जगह बनाई है। वह इंसान मनोज कुमार ही हैं जिन्होंने हिंदी फिल्मों में देशभक्ति का रंग चढ़ाया।
उन्हें हिंदी सिनेमा के लेजेंड कलाकार के तौर पर जाना जाता है, जिन्होंने फिल्म निर्माण की प्रतिभा के साथ-साथ निर्देशन, लेखन, संपादन और बेजोड़ अभिनय से भी दर्शकों के दिलों में अपनी खास पहचान बनाई है।
मनोज कुमार का असली नाम हरिकिशन गिरी गोस्वामी है और उनका जन्म पाकिस्तान में हुआ। जब वह सिर्फ दस वर्ष के थे तब उनका पूरा परिवार राजस्थान के हनमुनगढ़ जिले में आकर बस गया। मनोज ने अपना ग्रेजुएशन दिल्ली के मशहूर हिंदू कॉलेज से पूरी की। इसके बाद एक अभिनेता बनने का सपना लेकर वह मुंबई आ गए।

अभिनेता मनोज कुमार ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1957 में आई फिल्म 'फैशन' से की। फिल्म में मनोज ने छोटी सी भूमिका निभाई थी। 1957 से 1962 तक मनोज फिल्म इंडस्ट्री मे अपनी जगह बनाने के लिए बहुत मेहनत करते रहे। इस बीच उन्होंने कई बी ग्रेड फिल्मों में अभिनय किया लेकिन इनमें से कोई भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुई।
1965 में ही आई 'शहीद' मनोज के करियर की खास फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म में मनोज ने भगत सिंह की भूमिका को रूपहले पर्दे पर जीवंत कर दिया। इस फिल्म से पहले मनोज कुमार भगत सिंह की मां से मिलने गए थे। आप सभी को बता दें कि यह फिल्म सुपरहिट थी इस फिल्म के गीत 'ऐ मेरे प्यारे वतन' और 'मेरा रंग दे बसंती चोला' आज भी सुने जाते हैं, जिस तरह उस दौर में सुने जाते थे।
अगर आपको याद हो तो ज्यादातर फिल्मों में उनके किरदार का नाम भारत था इस वजह से लोग उन्हें भारत कुमार भी बुलाते थे। यही नहीं, मनोज कुमार के चाहने वालों में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री भी थे। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद, लाल बहादुर शास्त्री ने फ़िल्म में भगत सिंह का किरदार निभाने वाले अभिनेता मनोज कुमार से अपने नारे 'जय जवान, जय किसान' को लेकर किसान और सैनिकों पर आधारित कोई फ़िल्म बनाने को कहा। तब मनोज कुमार ने इस पृष्ठभूमि पर फ़िल्म 'उपकार' बनाई। 1967 में प्रदर्शित फिल्म 'उपकार' में मनोज कुमार किसान की भूमिका के साथ ही जवान की भूमिका में भी दिखाई दिए। फिल्म में उनके चरित्र का नाम 'भारत' था। बाद में इसी नाम से वह फिल्म इंडस्ट्री में मशहूर हो गये।

वर्ष 1970 में मनोज कुमार के निर्माण और निर्देशन में बनी एक और सुपरहिट फिल्म 'पूरब और पश्चिम' प्रदर्शित हुई। फिल्म के जरिए मनोज कुमार ने दौलत के लालच में अपने देश की मिट्टी को छोड़कर पश्चिम में पलायन करने के मुद्दे को उठाया। वर्ष 1972 में 'शोर' प्रदर्शित हुई ।
1974 में आई फिल्म 'रोटी कपड़ा और मकान' मनोज कुमार के करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में गिनती की जाती है। इस फिल्म के जरिये मनोज कुमार ने आम आदमी की जिंदगी में जरूरी रोटी, कपड़ा और मकान के मुद्दे को उठाया।
बचपन के दिनों में मनोज ने दिलीप कुमार की 'शबनम' देखी थी। फिल्म में दिलीप कुमार के निभाए किरदार से मनोज इस कदर प्रभावित हुए कि उन्होंने भी फिल्म अभिनेता बनने का फैसला कर लिया और फिर एक के बाद एक नायाब फिल्में दी।
उन्होंने अपनी हिट फिल्मों में वह कौन थी शहीद हरियाली और रास्ता हिमालय की गोद पत्थर के सनम उपकार करांति रोटी कपड़ा और मकान आदि सुपरहिट फिल्में देना
1976 में आई फिल्म 'दस नंबरी' की सफलता के बाद मनोज ने लगभग पांच वर्षों तक फिल्म इंडस्ट्री से किनारा कर लिया। 1981 में मनोज कुमार ने फिल्म 'क्रांति' के जरिये अपने करियर की दूसरी पारी शुरू की।
मनोज कुमार को अपने करियर में सात फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। फिल्म जगत के क्षेत्र में मनोज के योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 2002 में पदमश्री पुरस्कार, वर्ष 2008 में स्टार स्क्रीन लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार और वर्ष 2016 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।
भारतीय सभ्यता और संस्कृति को बड़े पर्दे पर दिखाने वाले देशभक्त अभिनेता मनोज कुमार ही है

                                                                                                                                     - प्रोफेसर रोहित बिसाईया