जाति के आधार पर कोई अपराधी नहीं - प्रोफेसर रोहित बिसाईया

 

  सदियों से समाज का एक बड़ा तबका आपराधिक समझा जाकर समाज की मुख्यधारा से वर्षों से कटा रहकर पीड़ित और अपमानित आपराधिक जीवन व्यतीत करता रहा है। यहां हम बात कर रहे हैं सांसी जाति की। आरंभ में सांसी जाति एक खानाबदोश जनजाति मानी गई जो मूलतः भारत के पश्चिमोत्तर क्षेत्र राजपूताना में केंद्रित रही परंतु 13 शताब्दी में भारत में आए मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा यह खदेड दी गई अब यह जनजाति मुख्यतः राजस्थान में केंद्रित है और भारत के अन्य स्थानों में भी मौजूद है

भारत की आजादी से पहले क्यों इस जाति को एक अपराधिक जनजाति माना जाता था?

आजादी से पहले यह जाति अपने जीवन यापन के लिए पशुओं की चोरी तथा अंग्रेजों द्वारा लागू कानूनों का उल्लंघन कर अन्य छोटे-छोटे प्राप्त कर अपने परिवार का जीवन यापन करते थी, जब अंग्रेजों द्वारा आपराधिक जनजाति अधिनियम 1871 घोषित किया गया तो इस सांसी जनजाति के "खानाबदोश जीवन" को गैरकानूनी घोषित कर दिया गया। इस कानून के अंतर्गत सांसी जाति के अलावा बावरिया, भांतु, कंजर, छारा तथा पारधी आदि को भी आपराधिक जातियां घोषित किया गया।
आजादी के बाद 1952 में इन जनजातियों को अपराधी मानने वाला कानून तो बदल गया, लेकिन समाज के कुछ लोगों का नजरिया आज भी इनके प्रति वैसा है
हालांकि मैं मानता हूं कि इस समाज के कुछ लोग आज भी गैर कानूनी व्यवसाय कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं परंतु कुछ लोगों के आधार पर संपूर्ण सांसी जाति को आपराधिक समझना अथवा संबोधित करना न्याय की दृष्टि से अनुचित है
मैं आपको बताना चाहता हूं कि स्वतंत्रता के बाद सांसी समाज को अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति आदेश (संशोधन) अधिनियम 1956 द्वारा अनुसूचित जाति के रूप में मान्यता दी गई और समय के साथ साथ समाज के युवा अपनी प्रतिभा के बल पर अपने समाज का नाम ना केवल देश में अपितु विदेशों में भी रोशन किया है आज हमारे पास ऐसे अनेक युवाओं के उदाहरण मौजूद हैं जो किसी आपराधिक गतिविधि के स्थान पर देश और समाज का नाम रोशन कर रहे हैं
1.हरियाणा की सांसी समाज की बेटी साहिबा सांसी ने वर्ष 2018 में खेलो इंडिया स्कूल में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता
2. पंजाब के अजीत सांसी ने प्रो कबड्डी की टीम पिंक पैंथर में वर्ष 2017 में मैन ऑफ द मैच का खिताब जीता
3. हरियाणा रोहतक की सांसी समाज की बेटी ज्योति मालावत का इंडियन वूमेन अंडर-19 क्रिकेट टीम में सिलेक्शन हुआ और आज अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी है
4. पंजाब भटिंडा के सनी हिंदुस्तानी ने इसी वर्ष सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आइडल के विनर का खिताब अपने नाम किया
5. शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में रोहित बिसाईया का नाम भी एक जाना-माना नाम है और इन्होंने पिछले वर्ष ही राष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी की असिस्टेंट प्रोफेसर की राष्ट्रीय परीक्षा उत्तीर्ण की।
इस प्रकार ऐसे अनेक नाम मौजूद है जिन्होंने समाज और देश का नाम रोशन किया है मैं अपनी बात पर विराम लगाते हुए सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि कोई भी अपराधी जन्म से नहीं, कर्मों से बनता है और वह अपराधी किसी भी धर्म तथा जाति का हो सकता है। जाति के आधार पर कोई अपराधी नहीं होता, इसलिए सोच बदलो, देश बदलेगा।

आपका अपना प्रोफेसर रोहित बिसाईया।