प्रदुषण की असली वजह का खुलासा

 

नई दिल्ली 07 नवम्बर 2019। अलीगढ़ (उ.प्र.) निवासी  डॉ. राम कुमार अत्रि जी ने बड़ा सटीक व्यंग्य किया है और एक कड़वा सवाल भी किया है इस देश से, देश की जनता से, देश के राजनेताओं से, प्रशासनिक मशीनरी से, वैज्ञानिकों से, पर्यावरण विशेषज्ञों से, कि क्यों आमजन को बेवकूफ बना रहे हो? अपने को लगातार घाटे और अनेक कष्टों में डालकर शहरों को पालने वाले जीवनदाता किसान को, अन्नदाता किसान को क्यों शहरियों की निगाह में दोषी ठहरा रहे हो? बन्द कर दो यह सब और सही कारणों को खोजो और उनका समाधान करो।

आज जब प्रदूषण मुँह फाड़े सबको खा डालने को उद्यत है तब कहना पड़ेगा कि प्रदूषण बढ़ाने में सभी तरह के अपशिष्ट अर्थात कूड़ा आदि जलाने (जिसमें एक पराली भी है) का योगदान केवल 9.5 प्रतिशत है। इसमें फैक्ट्रियों और वाहनों का योगदान सबसे ज्यादा है। वाहनों के धुएँ से 41 प्रतिशत तथा औद्योगिक प्रदूषण 18.6 प्रतिशत होता है। धूल आदि से 9.4,  हवाई यातायात से 5.6 एवं बिजली संयंत्रों से 4.9 प्रतिशत है। घरेलू कारणों यानी एसी व हीटर आदि सहित अन्य स्रोतों से होने वाले प्रदूषण की मात्रा लगभग 11 प्रतिशत है। यह बात अभी हाल में हमारे यहां फ़रीदाबाद से पधारे उद्योग जगत के एक स्वजन श्री कवींद्र तोमर ने हमें तफसील से समझाई। कहा कि चलो एक क्षण के लिए मान लेते हैं कि किसान ही यह कष्ट दे रहा है तो जरा सोचो कि उत्तरी हवा चलने पर पंजाब का धुंआ हिमाचल जाएगा या दिल्ली...? जरा यह भी सोचो कि पंजाब का धुआँ पंजाब को कष्ट न पहुँचाकर दिल्ली और एनसीआर ही क्यों आना चाहता है कोई इस पर क्यों नहीं सोचता...?

आइए...!!! सही कारणों की तह में जाएँ और सही तथ्य राष्ट्र और जनता के सामने रखे जाएँ। हमारे वैज्ञानिकों को इन भ्रम मूलक धारणाओं को सच्ची बात सामने लाकर बदलना चाहिए और उनमें सुधार लाने के लिए सरकारों व जनता पर दबाव डालना चाहिए। यदि सरकारें न मानें तो यह बात जनता को उचित माध्यमों से बतानी चाहिए। ध्यान रहे, प्रदूषण हमेशा शहरों और पढ़े-लिखे लोगों ने फैलाया है, ग्रामवासियों और अल्पशिक्षित लोगों ने कभी नहीं, हमारे गाँवों और पहाड़ों ने हमेशा हमें शुद्ध हवा, निर्मल जल, ठीकठाक दूध व फल और खरा अन्न दिया है और लगातार दे रहे हैं। बड़े समझदार और प्रगतिशील कहे जाने वाले हम लोग उसमें मिलावट करके देश को जहर परोसते हैं और लोगों को मौत के मुँह की ओर धकेलते हैं।

आइए...!!! हम सब किसानों के साथ खड़े हों और उन्हें बदनाम करने की दुष्प्रवृत्ति को विफल करें।